29 मार्च 2019 - 17:59
क्या ट्रम्प प्रशासन ईरान के तेल निर्यात को शून्य तक पहुंचाने में सफल हो सकता है?

तेहरान ने अमरीकी विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के ईरान विरोधी बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है।

अमरीकी विदेश मंत्रालय में ईरानी मामलों के प्रतिनिधि ब्रायन हुक ने ईरान के विरुद्ध घिसेपिटे आरोपों को दोहराते हुए कहा है कि ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों में अब किसी देश को छूट नहीं दी जाएगी।

गुरुवार को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बहराम क़ासमी का कहना था कि हुक को ईरान का विरोध करने की पुरानी बीमारी है।

अमरीकी अधिकारी के बयान की आलोचना करते हुए क़ासमी ने कहा, हुक ने एक बार फिर हास्यास्पद बयान दिया है और ईरानी जनता के प्रति अपनी दुश्मनी को उजागर किया है।

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना था कि वाशिंगटन को अब यह समझ लेना चाहिए कि वह दुनिया पर अपनी राय नहीं थोप सकता और दूसरे देशों पर हुक्म चलाने का ज़माना बीत चुका है।

ब्रायन हुक ने यह दावा ऐसे समय में किया है कि जब 8 देशों को ईरान से तेल ख़लीदने की 6 महीने की छूट में वृद्धि करने के विषय पर ट्रम्प प्रशासन में मतभेद उभरकर सामने आने लगे हैं।

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने मई 2018 में अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौते से निकलने की घोषणा करते हुए ईरान के ख़िलाफ़ एकपक्षीय रूप से प्रतिबंध फिर से लागू कर दिए थे। ट्रम्प ने दावा किया था कि वह ईरान के तेल निर्यात को शून्य तक पहुंचा देंगे। हालांकि चीन, भारत, जापान, इटली, तुर्की, इराक़, दक्षिण कोरिया और ग्रीस द्वारा ईरान से तेल ख़रीदने पर बल देने के कारण, अमरीका इन देशों को 6 महीने की छूट देने पर मजबूर हो गया था।

ट्रम्प प्रशासन ईरान के तेल निर्यात को शून्य तक पहुंचाने की अपनी भरपूर कोशिश कर रहा है, लेकिन जहां कई देश अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा पर डटे हुए हैं, वहीं अब ख़ुद ट्रम्प प्रशासन में भी इसे लेकर मतभेद उभरकर सामने आने लगे हैं।

दूसरी ओर अमरीका के अत्याचारपूर्ण एवं एकपक्षीय प्रतिबंधों को असफल बनाने के लिए ईरान भी हर संभव प्रयास कर रहा है।

हाल ही में ईरान के उप राष्ट्रपति इसहाक़ जहांगीरी ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान को उसकी आय के मूल स्रोत से वंचित किया गया तो तेहरान चुप नहीं बैठेगा, बल्कि उचित समय पर ज़रूरी कार्यवाही करेगा।

मध्यपूर्व में तेज़ी से बदलते घटनाक्रमों और विश्व की वर्तमान परिस्थितियों के मद्देनज़र ऐसा नहीं लगता कि अमरीका अब और अधिक दुनिया में अपनी दादागिरी चला पाएगा, यह बात जितनी जल्दी अमरीकी अधिकारी समझ लें, यह उनके राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए बेहतर होगा।